35 year old thomas sheridan rare disorder – दुर्लभ बीमारी से शख्स का खाना हुआ मुहाल, फल-सब्जी-अंडा देखते ही करने लगता है उल्टी!

उम्र चाहे जो हो, जिंदगी की चुनौतियां किसी को नहीं बख्शतीं. कई लोग खाने-पीने में आजादी पसंद करते हैं, लेकिन कुछ की जिंदगी इतनी अनोखी होती है कि सुनकर सब दंग रह जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही 35 साल के शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सिर्फ ब्रेड, सीरियल (अनाज) और मिठाइयों पर जिंदा है. इस शख्स का नाम थॉमस शेरिडन (Thomas Sheridan) है, जो यूनाइटेड किंगडम (UK) के रहने वाले हैं. बता दें कि थॉमस ने कभी फल, सब्जी, अंडा या मांस नहीं खाया, बल्कि इनका नाम सुनते ही उन्हें उल्टी करने का मन करने लगता है. सोशल मीडिया पर जब उन्होंने अपनी इस विचित्र आदत के बारे में बताया, तो लोग हैरान रह गए. इसकी वजह एक विचित्र बीमारी है, जिसे मेडिकल टर्म में एवॉइडेंट रेस्ट्रिक्टिव फूड इंटेक डिसऑर्डर (ARFID) कहा जाता है. इसकी वजह से लोगों को कई फूड्स बिल्कुल ही पसंद नहीं आते. ऐसे में मजबूरी में उन्हें कुछ और ही खाना पड़ता है.

यूके के रहने वाले थॉमस रोजाना खाने में दो सफेद ब्रेड, तीन कटोरी शरेडीज सीरियल और ढेर सारी हैरिबो मिठाइयां खाते हैं. फल, सब्जी, अंडा या मांस का नाम सुनते ही उन्हें उल्टी होने लगती है. इस अजीब डाइट की वजह से उन्हें प्रोटीन और विटामिन सप्लीमेंट्स लेने पड़ते हैं, लेकिन सिर्फ वही, जिनका स्वाद उन्हें बर्दाश्त हो. दो साल पहले उन्हें ARFID का पता चला था, जो कुछ खास खाने से रोकता है. थॉमस ने बताया, “एक बार दोस्तों के साथ ड्रिंक करने के बाद सब बेकन सैंडविच की बात कर रहे थे. मैंने अंडा और सॉसेज का सैंडविच बनाने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही अंडा मेरे मुंह में गया, मैंने 10 फीट दूर उल्टी कर दी.” थॉमस का कहना है कि खाने की आदत ने नौकरी करना भी मुश्किल कर दिया और जिंदगी मुश्किल हो गई. वे दफ्तर में कुछ खाते-पीते नहीं, जिसकी वजह से पिछली बार 10 दिन की नौकरी में ही उनका 21 पाउंड (लगभग 10 किलो) वजन कम हो गया.

थॉमस अपना इलाज करवाने के लिए पैसा इकट्ठा कर रहे हैं. (इनसेट में थॉमस)

थॉमस के माता-पिता बताते हैं कि 18 महीने की उम्र से ही उन्होंने कुछ खास खाना बंद कर दिया था. एक दिन उन्होंने मुंह बंद कर लिया और फल-सब्जी खिलाने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं. डॉक्टरों ने सलाह दी कि उन्हें भूखा रखा जाए, ताकि वे खाना खाएं और उनके पिता ने इनाम देने की कोशिश की, लेकिन कुछ काम नहीं आया. स्कूल में उन्हें दोपहर के खाने के वक्त घर जाने की इजाजत थी, क्योंकि वे स्कूल का खाना नहीं खा सकते थे. बड़े होने पर भी यह डर उनकी जिंदगी का हिस्सा बना रहा. अब थॉमस अपनी जिंदगी बदलने के लिए 8000 डॉलर (लगभग 6 लाख 80 हजार रुपए) जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हिप्नोथेरेपी करवा सकें. लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं कि यह इलाज उनकी ARFID की समस्या को ठीक कर पाएगा.

क्या होता है हिप्नोथेरेपी?
खाने को लेकर थॉमस का डर इतना गहरा है कि डॉक्टर भी हैरान हैं. अब आखिरी उपाय हिप्नोथेरेपी है, जिससे संभावना है कि वो आम लोगों की तरह हर चीज को वो खाना शुरू कर दें. बता दें कि हिप्नोथेरेपी वो प्रक्रिया है, जो थॉमस जैसे लोगों के दिमाग को नए खाने के लिए तैयार करने की कोशिश करती है. थॉमस कहते हैं, “मैं बस सामान्य जिंदगी जीना चाहता हूं, जहां मैं दोस्तों के साथ डिनर कर सकूं.” सोशल मीडिया पर थॉमस की कहानी ने लोगों को दो खेमों में बांट दिया है. कुछ लोग उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं, जो इतनी मुश्किल हालत में भी कोशिश कर रहे हैं. वहीं कुछ उनकी अजीब आदत पर सवाल उठाते हैं, सोचते हैं कि यह सिर्फ जिद है. लेकिन थॉमस के लिए यह जिद नहीं, बल्कि एक गंभीर डिसऑर्डर है, जो उनकी जिंदगी को कंट्रोल करता है. साथ ही उनके मानसिक और शारीरिक जिंदगी को भी प्रभावित करती है. ARFID के बारे में जागरूकता कम है और थॉमस अपनी कहानी शेयर कर लोगों को इसके बारे में बता रहे हैं. उन्होंने कहा, “लोग सोचते हैं कि मैं बस नखरे कर रहा हूं, लेकिन यह मेरे कंट्रोल में नहीं है.”

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